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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                            दिन बीते रात बीते, पल पल बीता जाय।
                                                                 
                            
जनहित में कुछ क्षण लगें,जीवन सफल कहाय।।

- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर 
 
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5 वर्ष पहले

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