ज़िन्दगी ही दुश्वार ना कर दे कभी कहीं ये ज़माना निर्मोही तिरी
मुसीबत खड़ी ना करदे कहीं साफ़ दिली और सादा-लौही तिरी!
मनफ़ी लोगों से तनिक फ़ासला सदा बनाकर रखना ही आच्छा
आबरू पर न उठा सके सवाल कोई सिरफिरे ऐसे विद्रोही तिरी!
-एन आर कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X