सहज रहने नहीं देतीं जीवन को हमारी हसरतें और ख़्वाहिशें
बोझिल कर देती हैं मुसाफ़िरत को तमाम गैर-ज़रूरी आराइशें!
किस क़दर ख़ूबसूरत जीवनके रंगों को बदरंग किए जा रही हैं
आलाइशों में रोज नया इजाफ़ा कराती हमसे हमारी फ़रमाइशें!
-एन.आर. कस्वाँ
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