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प्यास बुझती ही नहीं है

                
                                                         
                            कुबेर सा खजाना उसका
                                                                 
                            
पर संतुष्टि नहीं है
छत्तीस व्यंजन थाली में
पर संतुष्टि नहीं है
भर रहे बक्से पोशाक से उसके
पर क्या करे भाई कपड़े ही नहीं है
जरूरत तो बूंद की
पर सागर को ढूंढता है
मिल गया सागर तो
प्यास बुझती ही नहीं है
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19 घंटे पहले

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