नारी सशक्तिकरण
फेसबुक पर मित्र बनी
एक अद्भुत षोडशी
प्रोफाइल चित्र में जिसकी
श्री भगवती थी विराजती
पहला संदेश भेजती है कि
गुरु बनो कामोपदेश की
अनुरोध था कि रतिरहस्य के
पृष्ठ पृष्ठ को प्रकाशित करो
कंदर्प दर्पण के हर कोने को
विस्तार से उद्घाटित करो
कहा चार दशकों कि तुम
अनुभवी हो ,परिपक्व हो
तुम ही तो मेरे रिक्त कोश
की पूर्णता की नई कड़ी हो
मन में आया कह दूं उससे
अशिष्ट हो ,वाचाल हो
लज्जाहीनता की साक्षात
तुम प्रतिमान हो
छद्म आधुनिकता की तुम
असफल प्रतिनिधि हो
ऐसा मन ही क्या जो
हवा के झोंके में बह गया
पल के आवेग में इधर उधर
लुढ़क गया ,बहक गया
संस्कार की कड़ी नहीं तो
जीव प्राणहीन है
नए युग की ऐसी जरूरतें
अजीबो-गरीब है
चलो वत्सला तूझे आज
स्वतंत्रता का अर्थ भी सिखला ही दूं
चरित्र निर्माण का गुरु मंत्र भी सीखा ही दूं
आसमय प्रवाह की प्रलय में
सर्वस्व बह जाएगा
धीरज धरो समय के साथ
प्रकाशित सब हो जाएगा
चरित्र निर्माण का नवांकुर
नारी सशक्तिकरण बन जाएगा।
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