हमदर्द समझा जिसे, आखिर दिल वही पत्थर हुआ,
फिर दर्द टूटे दिल का, मौत से बदतर हुआ।
वादे किए थे साथ चलने के, हर एक तूफान में,
तन्हा मुझे वो छोड़ आया, दर्द के वीरान में।
कागज के फूलों सा रहा, उसका हर एक इकरार भी,
सौदा समझ कर कर गया वो, रूह से व्यापार भी।
मेरा सुकून-ए-ज़िंदगी, अब रेत का समंदर हुआ,
फिर दर्द टूटे दिल का, मौत से बदतर हुआ।
आंखों में मेरी अश्क देकर, वो किसी और का हो गया,
जिस पर लुटाई हर खुशी, वो चैन मेरा खो गया।
शीशे सा टूटा ख्वाब मेरा, चुभ रहा है रात-दिन,
कैसे जिएगा अब ये दिल, उस बेवफा के बिन?
हर सांस जैसे बन गई ज़हर, ज़ख्म जो अंदर हुआ,
फिर दर्द टूटे दिल का, मौत से बदतर हुआ।
अब ना शिकायत है कोई, ना ही कोई फ़रियाद है,
आबाद रहे वो अपनी दुनिया में, मेरा दिल बर्बाद है।
कि अब ना शिकायत है कोई, ना ही कोई फ़रियाद है,
आबाद रहे वो अपनी दुनिया में, मेरा दिल बर्बाद हैl
जितना भी चाहा टूट कर, उतनी ही गहरी चोट है,
मेरे तो आंसू साफ हैं, पर उसकी नीयत में खोट है।
अभय, वफ़ा के नाम पर, ये कैसा अब मंज़र हुआ,
कि हमदर्द समझा जिसे, आखिर दिल वही पत्थर हुआ,
फिर दर्द टूटे दिल का, मौत से बदतर हुआ...
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