सदैव मानव नसीब के मारे
ही मरे हैं, चाहे वो साधु
संत हों या पीर फकीर।।
मुकद्दर ने जो लिख दिए
अपने हिस्से में, वही है
जीवन पर्यंत जीने की लकीर।।
- एम के सिंह
भागलपुर (बिहार)
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X