श्रृंगवेरपुर पहुंचे है राम,
निशाद राज़ ने किया प्रणाम,
कन्द मूल फल लेकर आया,
प्रभु चरणों में शीश झुकाया,
राम ने उसकों, कंठ लगाया,
हे प्रभु इतनी कृपा कर दिजिए,
श्रृंगवेरपुर में पधार कर दास को,
सेवा का मौका दिजिए,
सुनो मित्र पिता की आज्ञा से वन
जाने का व्रत लिया है,
चौदह वर्ष बाद मैं आऊंगा,
तभी सारे मित्र धर्म निभाऊंगा,
गंगा पार करा दो , कोई केवट को बुला दो,
केवट ने भी किया विचार,
चरण धोनें का आया भाव,
अपने सारे कुल को भवसागर पार
करवाऊंगा,चरण रज चरणामृत लेके,
प्रभु को मैं मनाऊंगा,
धोए चरण, सफ़ल करा जीवन,
करवाया गंगा पार,
उतराई जब देने लगें,
चरण पकड़ कर कहने लगे
मैंने गंगा पार कराया,
आप करना भव से पार।
- प्रमिला त्रिवेदी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X