सजग चेतना
नवल चाव संग
स्वप्न देखना
धवल भाव रंग
खेल खेलना
थोड़ा सा हास्य व्यंग
दर्द वेदना
छू मन्तर का अंग
नव पीढी़ का ढंग
-मनीष कुमार श्रीवास्तव 'प्रकाशश्री'
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