तुम बनो सूरज की वह प्रतिमा,
तुम्हारे चेहरे पर दिखना चाहिए सदा लालिमा।
उस लालिमा में एक ऐसी हो अनल,
जिसे देख तुम्हारे दुश्मन की धड़कन उठे मचल।
तुम अपनी मेहनत की चाबी से खोल देना अपनी किस्मत का ताला,
होश-चित्त खो जाए, देखकर तुम्हारा तेज उजाला।
तुम बनकर आना वह नव-किरण,
जिसे देख सब करें तुम्हारा सम्मान।
संघर्ष तुम्हारा रथ है, तुम उसके सारथी बलवान।
चलते रहना तुम तब तक, जब तक मिल न जाए मंजिल का मुकाम।
रुकना मत तुम कभी, जब तक पा न लो अपनी कामयाबी का शिखर।
एक उत्साह भरकर रखना तुम अपने भीतर सदा,
हारने मत देना अपने हौसले को,
सूरज की तरह जलते रहना सदा।
तुम बनो सूरज की वह प्रतिमा,
तुम्हारे चेहरे पर दिखना चाहिए सदा लालिमा।
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