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शाम भी मुस्कुराकर कहती है:.......

                
                                                         
                            न धूप की तेजी
                                                                 
                            
न अंधेरे का साया
मैं वो रंग हूँ
जो सबके मन को भाया

शाम भी मुस्कुराकर कहती है
न दिन हूँ न रात हूँ
मैं सबसे खास हूँ
मैं शाम हूँ

न मैं अंधेरा हूँ
न मैं उजाला हूँ
चाय और नाश्ते का
स्वाद बढ़ाने वाली
मैं हसीन शाम अलबेली हूँ

दिन और रात की
दिल और जान हूँ
खूबसूरत दिलकश
अंदाज और आगाज़ हूँ
मैं सबसे खास
खूबसूरत शाम हूँ

हर दिल की राहत हूँ
सबकी मैं चाहत हूँ
दिन और रात के बीच
मुस्कुराती शर्मीली शाम हूँ
समझो ना मैं आम हूँ
क्योंकि मैं बहुत खास हूँ
मैं शाम हूँ

सबको सुकून चैन देने वाली
धड़कनों में बसने वाली
एहसासों की खुशबू बिखेरती
सबके दिल की अरमान हूँ
मैं अनोखी शाम हूँ

दिल को प्रफुल्लित करने वाली
खुशियों में खुशियां भरने वाली
हर रोज़ समय पर आने वाली
सबका दिल बहलाने वाली
समय की कद्र करने वाली
हँसने और हँसाने वाली
हँसमुख शाम हूँ

दिन और रात के लबों पर
खिलने वाली मुस्कान की
चश्मदीद गवाह हूँ
मस्ती और उमंग भरी
हर्षित करने वाली
मोहिनी शाम हूँ
हां मैं आम नहीं
खास हूँ मैं शाम हूँ

न धूप की तेजी
न अंधेरे का साया
मैं तो वो रंग हूँ
जिसने सबका
दिल बहलाया।।

-ममता तिवारी
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6 घंटे पहले

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