आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ये वक़्त भी गुज़र जाएगा

                
                                                         
                            ये वक़्त भी गुज़र  जाएगा,
                                                                 
                            
सुनहरा कल फिर से आएगा,
खुशियां देगी फिर से दस्तक,
सब कहते टेक प्रभु के मस्तक...!!

समय दुविधा हर जाएगा,
सीख बहुत कुछ दे जाएगा,
सूझबूझ से हैं लड़ना,
और नियम से हैं चलना,

देश मेरा फिर आबाद होगा,
संकट को तो टलना होगा,
क्योंकि ये वक़्त भी गुज़र जाएगा,
सुनहरा कल फिर आएगा...!!!

प्रभु की लीला प्रभु ही जानता हैं,
छीना है सब कुछ उसने,
किसी ना किसी बहाने,
वो लौटाना भी जानता हैं,
इसलिए ये वक़्त भी गुज़र जाएगा,
सुनहरा कल फिर से आएगा....!!!!!

-@Mahi_

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर