ये वक़्त भी गुज़र जाएगा,
सुनहरा कल फिर से आएगा,
खुशियां देगी फिर से दस्तक,
सब कहते टेक प्रभु के मस्तक...!!
समय दुविधा हर जाएगा,
सीख बहुत कुछ दे जाएगा,
सूझबूझ से हैं लड़ना,
और नियम से हैं चलना,
देश मेरा फिर आबाद होगा,
संकट को तो टलना होगा,
क्योंकि ये वक़्त भी गुज़र जाएगा,
सुनहरा कल फिर आएगा...!!!
प्रभु की लीला प्रभु ही जानता हैं,
छीना है सब कुछ उसने,
किसी ना किसी बहाने,
वो लौटाना भी जानता हैं,
इसलिए ये वक़्त भी गुज़र जाएगा,
सुनहरा कल फिर से आएगा....!!!!!
-@Mahi_
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X