निराश न कर मन को खुद को
तुझे बताना है,
लक्ष्य अपना देखकर आगे
बढ़ते जाना है,
कांटे अगर राह में कांटों को
फूल बनाना है,
तू कुछ भी कर सकता है
विश्वास ऐसा जगाना है,
निराश न कर मन को...
अर्जुन सा साधकर तरकश से
तीर चलाना है,
बन भीम सा प्रचंड़, पहाड़ से
तुझे टकराना है,
जीवन के इस कुरुक्षेत्र में
जौहर अपना दिखाना है,
इस छोटी सी चिंगारी को
ज्वालामुखी बनाना है,
मेहनत के पथ पर चलकर
इतिहास नया बनाना है,
निराश न कर मन को...
कर्म करते रहना है कर्म को
पूजा बनाना है,
कर्म से ही इस जीवन का
भाग्य तुझे जगाना है,
दे हौसला जज्बातों को मुकाम
एक बनाना है,
देख कर लक्ष्य अपना, अंगारों
पर चलकर जाना है,
अंगारों से खुद के अंदर अनल
तुझे जलाना है,
निराश न कर मन को...
- विक्रम भारत
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