नाम तेरा लिया तो सहर हो गई
दोस्तों की सुबह शाम नज़र हो गई
शोर करके पुकारा उनका कुछ न हुआ
हमने चुपके से देखा खब़र हो गई
-लोक डोंगरें स्वप्निल
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