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बिना दिल के जी पाना

                
                                                         
                            बड़ा मुश्किल होता है , बिना दिल के, यों जी पाना !
                                                                 
                            

बड़ा मुश्किल होता है , बिना दिल के, यों जी पाना ,
किसी की उम्मीद ए नाज में , रह रह के मर जाना !
वो रहा ना,शुक्र-गुज़ार , गया सारी मुरादें तोड़कर ,
पीछे फ़क़त रह गया , तालिब ए इश्क में पछताना !!
जिस्मानी सांस बची केवल , भुला जीवन ने मुस्काना ,

बड़ा मुश्किल होता है , बिना दिल के, यों जी पाना!

तुझे क्या मालूम , मोहब्बत ए फलसफा के कायदे ,
फर्ज ए अदायगी में , मरने जीने के मासूम, वायदे !
तूने जो गर्दिश ए प्यार में , थोडा वक्त गुजारा होता ,
तुझे भी बेबसी का , अहसास ए इल्म हुआ होता !!
तू क्या समझेगा बेनियाज , पाक चाहत का पैमाना ,

बड़ा मुश्किल होता है , बिना दिल के, यों जी पाना !

ना दास्तां, ना निशाने ख्यात , ना कोई भी तहरीर ,
फिर यादों में क्यों उभरे , किसी की धुंधली तस्वीर !
मन क्यों दुखी , बिन हवाओं के, महक आती नही ,
बिन मुसाहिब के , आलम की,खुशीयाँ भाती नही !!
गम गलत को,खाली करदे , चाहे पी,पी के,मयखाना ,

बड़ा मुश्किल होता है , बिना दिल के, यों जी पाना !

किसी की उम्मीद ए नाज़ में , रह रह के मर जाना ,
बड़ा मुश्किल होता है , बिना दिल के, यों जी पाना !!
-एल पी शर्मा " लक्ष्य "
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

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