मैं स्त्री हूँ,
पर मैं इंसान हूँ,
मुझे तुम्हारी वस्तु नहीं बनना,
मैं अभी भी इंसान हूँ।
स्त्री इंसान ही है,
इसको अलग अलग मत करो।
- ललित दाधीच
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