दिल के दर्द को टालूँ कैसे,
तुझ बिन ख़ुद को पालूँ कैसे?
मन की पीर बड़ी है भारी,
मन को आज सँभालूँ कैसे?
दिल के दर्द को टालूँ कैसे?
श्वासों में तेरी ख़ुशबू है,
नयनों में तेरी तस्वीरें।
तन-मन में तू बसी हुई है,
गीत विरह के गा लूँ कैसे?
दिल के दर्द को टालूँ कैसे?
सूनी-सी मेरी देहरी है,
सूना ही है मेरा आँगन।
सूने सारे स्वप्न पड़े हैं,
इनमें फिर रंग डालूँ कैसे?
दिल के दर्द को टालूँ कैसे?
पवन तेरे संदेशे लाती,
मन मेरा पुलकित कर जाती।
तू मुझको अब यह बतला दे,
तुझको फिर से पा लूँ कैसे?
दिल के दर्द को टालूँ कैसे?
- कुमार सर्वेश
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