किस्मत का खुदा कहां बेठा है
हर पनपती आश को टुटते देखा है
ना जाने किस्मत का खुदा कहां बेठा है
उम्मीद की जलाकर ज्योति निकल कर चले
फिर भी हर बार इरादों को बिखरते देखा है
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