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केश सज्जा

                
                                                         
                            बिखरे बाल बरबादी , बंधे बाल खुशाल।
                                                                 
                            
कटे बाल सम भाव के ,ऐसा केशन हाल।।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे
4 वर्ष पहले

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