जिसकी तलाश में निकल पड़े हैं, छोड़कर अपना हर साहिल।
इन अँधेरी रातों को तुम ही अब मेरी राह दिखाना,
थक कर न बैठूँ कभी, हर मुश्किल को पार लगाना।
यूँ ही इस अनजान सफर से उम्मीदें लगाए बैठा हूँ,
अपनी मेहनत और तेरे कर्म पर ही आस जगाए बैठा हूँ।
बदल दे मेरी खामोशी को एक दिन ऐसी कामयाबी में,
कि देख सके यह दुनिया भी मेरी तकदीर की ताबिंदगी में।
ए खुदा, बस इतनी सी इल्तिज़ा है तुझसे हर पल,
सँवर जाए मेरा आज, और महक उठे मेरा कल।
रब से यूँ ही दुआ है, बनाना हमें उस मुकाम के काबिल,
जहाँ पहुँच कर ठहर जाए मेरा यह आवारगी-ए-दिल।
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