गूंगे बहरे सब बन बैठे,
बोल कोई,क्यों,नहीं रहा कुछ।
ऐसे लगता जैसे,अंग्रेजो का शासन अब भी है,
भ्रष्टाचारियों की खुली खिलाफत।
करने में भयभीत हैं लोग,
सांसद और विधायक की तो।
नहीं खिलाफत की औकात...
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