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इंसानों का इंसानों में !

                
                                                         
                            साथ चले न,चले कोई,
                                                                 
                            
भीतर एक पैमाना,
चलता है...

खुद से खुद को रुबरु करे.
अंतर्मन का एक मुआयना ..
चलाता हैं....

हम में तुममे भेद हैं, इंसानों का..
इंसानों में यहीं रोग,पुराना,
चलता हैं...

लोग आशिया तो बदल ले,
उनका है क्या? यहाँ का ठिकान,पता..
चलाता है...

"आनंद "तुम मार्ग तथागत लो,
फिर इस देह में कहा आना-जाना..
चलता हैं..

~हिमांशु भारद्वाज "आनंद "
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11 घंटे पहले

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