पूछते भी नहीं हो तुम
और मैं बताता भी नहीं हूँ
तुम्हें भी महसूस ना हुआ मेरा दर्द
और वो दर्द मैं जताता भी नहीं हूँ
एक तुम हो की आँखों में इतने अल्फ़ाज़ समेटे हो
इक मैं हूँ जो कोई राज भी तुमसे छुपाता ही नहीं हूँ
मायने रखती हैं मुझको ये तुम्हारी खामोशियाँ
मगर क्या कहती हैं ये खामोशियाँ
मैं समझ पाता भी तो नहीं हूँ
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