अक्सर ये सोच कर हम घबराए हुए हैं
किस क़दर हम इश्क़ में ठुकराए हुए हैं
पूरा जमाना उसका अपना हो गया
इकलौते हम ही उसके पराए हुए हैं
मानो जिस्मों से दूर ये अब साये हुए हैं
उसकी हर खता को कर दिया नज़रंदाज़ हमने
उसकी यादों को हम सीने से लगाये हुए हैं
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