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प्रकृति प्रेम की गाथा रचाती है

                
                                                         
                            बरसात की बूंदें जब गिरती है,
                                                                 
                            
मिट्टी को तरोताजा करती है!!
ये आवाज़ मधुरता से बोलती है,
प्रकृति प्रेम की गाथा रचाती है!!

बीती यादें ताज़गी से भर जाती है,
प्यार और खुशियों को बहा जाती है!!
पानी की बूंदें मीठा गीत गाती है,
हरदम खुद को स्वच्छ बनाती है!!

बरसात के बाद रंगीनी छाती है,
नए सपनों से सजी यह राती है!!
महकती हुई मिट्टी की खुशबू,
उमंग की लहरें मन को भाती है!!

बरसात की ये प्यारी सी बूंदें,
जीवन को रंगीन और नया कर देती है!!
चिंताओं से मुक्ति का संदेश देती है,
हर दिल को आनंद से भर देती है!!

ये बरसातें फिर अपने पास बुलाती है,
प्रकृति की छत ताजगी से सजाती है!!
मन की गहराई से बरसात में भींग जाएं,
खुशियों के साथ यह जीवन बिताएं!!

डॉ. शशांक शर्मा (मयारू छत्तीसगढ़िहा)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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2 वर्ष पहले

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