आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सहमा हैं लोकतंत्र

                
                                                         
                            लोकतंत्र सपने में आया,डरा-सहमा और घबराया
                                                                 
                            
मैंने पूछा—"कौन हो भाई? उसने कहा तेरी परछाई

नींद खुली,फिर आँख मली,करवट बदली और सो गया
अच्छे दिनों' की लेकर आस,मैं फिर सपनों में खो गया

लोकतंत्र ने फिर जगाया,हाथ पकड़कर मुझे उठाया
कहने लगा संकट में हूँ भाई,पीछे पड़े हैं कलम कसाई

लोकतंत्र की आँखें थीं नम,माथे पर बल, दिल में था ग़म
लोकतंत्र ने व्यथा बताई,अपनी पूरी कथा सुनाई

बुद्ध ने मुझको जन्म दिया हैं,गुरु गोविंद सिंह ने पाला हैं
महावीर- कबीर ने,हर संकट से बहार मुझे निकाला हैं

सामंतों ने क़ैद में डाला,मुग़लों ने पैरों से मसला
पाखंड की आग में झुलसा,अंग्रेज़ों ने जूतों से कुचला

ज़ुल्मों से मैं चीख़ रहा था,न्याय की ओर देख रहा था
गाँधी जी ने जोत जलाई,फिरंगिंयों से मेरी जान बचाई

डॉ.आंबेडकर ने ताक़त देकर,पाखंड पर प्रहार किए
नेहरू-पटेल ने अपनाकर,जन-जन के सपने साकार किये

मैं लोकतंत्र हूँ,जन जन की ताक़त
मुझसे बना हैं यह समृद्ध भारत

आज अगर मैं यहाँ न होता
गरीब का बेटा क्या ? राजा होता

लोकतंत्र की जब व्यथा सुनी,रातों की मेरी नींद गई
लोकतंत्र को बचाना होगा,जन-जन को समझाना होगा

मातृभूमि हैं माता मेरी,लोकतंत्र हैं पिता समान
लोकतंत्र हैं जब से आया,देश बना हैं और महान

लोकतंत्र ख़त्म हुआ तो,किस्मत देश की फूट जाएगी
धर्म-जाति में झगड़े होंगे,एकता की डोर टूट जाएगी

लोकतंत्र का हैं जब तक शासन,तब तक जनता का सिंहासन
जिस दिन लोकतंत्र हट जाएगा,अस्तित्व वतन का मिट जाएगा

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर