मेरी नज़र में एक अवारा सा सपना, ख्वाब है सनम,
रात में चांद देखता हूं तो दिखता है चेहरा तुम्हारा,
क्या वो तुम्हारी है,जिसकी जिक्र करते हो दिन रात तुम,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X