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आओ मिलकर शपथ उठाएँ

                
                                                         
                            जिस मिट्टी ने जन्म दिया, उस मिट्टी का मान है हिंदी,
                                                                 
                            
भारत माँ के माथे की, चमकती पहचान है हिंदी।
नहीं किसी से कम हमारी, न किसी से शर्माएँगे,
दुनिया चाहे जो भी बोले, हिंदी में ही गाएँगे!

तुलसी की रामायण है हिंदी,
कबीर की वाणी है हिंदी,
प्रेमचंद की कलम है हिंदी,
भारत की कहानी है हिंदी।

हिंदी में माँ की ममता है,
हिंदी में वीरों की शान,
हिंदी में गूँजी है सदियों से
भारत की जय-जयकार!

जो भाषा दिल को जोड़ सके,
जो टूटे मन को मोड़ सके,
जो आँसू में मुस्कान बने,
जो भारत की पहचान बने—
वो हिंदी है, वो हिंदी है,
मेरे भारत की हिंदी है!

हम हिंदी को अपनाएँगे,
हर दिल तक इसे पहुँचाएँगे,
ज्ञान-विज्ञान के हर आँगन में
हिंदी का दीप जलाएँगे।

अंग्रेज़ी सीखो, दुनिया जीतो,
हर भाषा का सम्मान करो,
पर अपनी माँ की भाषा का
कभी न अपमान करो!

हिंदी हमारी आन रहे,
हिंदी हमारी शान रहे,
जब तक सूरज-चाँद रहे,
हिंदी का सम्मान रहे!

आओ मिलकर शपथ उठाएँ—
हिंदी का गौरव बढ़ाएँ!
अपने शब्दों से, अपने कर्मों से
भारत को और महान बनाएँ!

हिंदी बोलेगा हिंदुस्तान,
हिंदी बनेगी भारत की शान!
हिंदी हमारी पहचान है—
और यही हमारी सबसे बड़ी आन है! 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
19 घंटे पहले

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