छलक गई यदि कुछ बूंदे तो जाम नहीं खाली होते
काम बहुत बढ़ जाने से भी हाथ नहीं खाली होते
जीवन कांटो की बाड़ी जितना सुलझे उतना उलझे
घूंट गले दो उतर गये यदि तो कोष नहीं खाली होते .
-दिनेश चौहान
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