तट जल से डूबे रहे बस्ती हाहाकार
संकट अपना बोलने गंगा पहुंची द्वार .
अपनी सारी गंदगी पहुँचाते सब लोग
लौट वही फिर मिले करते उसका भोग.
दिनेश चौहान
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