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तेरे घर के सामने

                
                                                         
                            तेरे घर के सामने
                                                                 
                            
मेरा घर क्यू नहीं
देखे बिन तुझे मेरा
दिन बनता नहीं
पर सामने जब भी आओ तो
नजरे झुकी
दिल को कैसे समझाऊ मैं
आता नहीं
तुम समझो ना मेरी बातों को
मेरे वादो को इरादों को
तुम्हे प्यार कितना
हम करते हैं
पर सामने कुछ भी कहने से
डरते हैं

तेरे होठों पे मेरा नाम
कोई उलझन नहीं
देखु तुजको हर शाम
मेरे दिल की लगी
पर सामने जब न आओ तो
टूटे हर खुशी
फिर भी तुम मुझसे रूठे क्यू
मैं समझू नहीं
तुम समझो तो मेरी बातो को
मेरी आखों को और इरादों को
तुम्हे याद कितना
हम करते है
पर बोलने से कुछ भी, हम
डरते है

क्यू ये रूठी हुई सी
जिंदगी छूटी हुई सी
मौत भी ना आए तो मैं क्या करू
तेरे बिन जिया जाये ना
मैं क्या करू
तू ही बता
तू ही बता
मैं क्या करू
मैं क्या करू

मैंने क्या कहा
तुमने क्या सुना
क्यू डूबे हो इस तरह
मेरी यादों में ये बता
कैसे कह दे कि मेरा दिल तेरा हुआ
तेरा हुआ...... तेरा हुआ
मेरे दिल का चैन तेरा हुआ

मेरे घर के सामने
तेरा घर है नहीं
पर दिल मे मेरे रखती हूँ
तुझको मैं यू ही
जब सामने आजाता है तू
मेरे यूही
कुछ भी कहने से डरती हूँ तू
समझे नहीं
मैं समझू तेरी बातों को
तेरी आँखों को तेरे वादों को
तुझे प्यार कितना
हम करते है
पर सामने कुछ भी कहने से
डरते है

तेरे घर के सामने
मेरा घर क्यू नहीं
देखे बिन तुझे मेरा
दिन बनता नहीं
पर सामने जब भी आओ तो
नजरे झुकी
दिल को कैसे समझाऊ मैं
आता नहीं
तुम समझो ना मेरी बातों को
मेरे वादो को इरादों को
तुम्हे प्यार कितना
हम करते हैं
पर सामने कुछ भी कहने से
डरते हैं
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1 hour ago

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