माही वे...... माही वे.....
तेरे होठों को मैं चूमलू
सामने आजा वे...
अपनी बाहों में मैं थामलू
जितना भी दर्द हो
तेरे ऑंसू मैं सहना सकू
बनजाऊ साया अगर
तेरी छाँव मैं बनकर रहूँ
माही वे...... माही वे....., प्यार तुजको मैं करता रहूँ
उन वादो का उन कसमो का क्या
जो तुमने हम से किए
यादो में मेरी जो तुम थे समाए
वो सपने हम ने जिए
अब किसी की फिकर, न किसी की है परवा
जो तुम ना हम को मिले
तेरा साया मैं बनकर रहूँगा हमेशा
प्यार जो करते तुम्हे
माही वे, माही वे
माही वे, माही वे
तेरी यादो में बस मैं रहूँ
तेरी यादो में बस मैं रहूँ
माही वे...... माही वे.....
तेरे सीने पे सर मैं रखू
सामने आजा वे…
अपनी सांसो को मैं थामलू
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