शब्द तो बहुत समझ लिए मेरे
अब खामोशी समझ कर दिखाओ तो जाने
शोर तो बहुत था इस मन में
पर थम गया सा फिर आज एक तूफान है
हर ओर से लोग बुला रहे मुझे
यह चकाचौंध देखकर मन भी हैरान है
पर एक कदम भी बढ़ाने से डरती हूँ मैं
हरियाली सा दिखने वाला वो एक श्मशान है
हँस लूँगी फिर एक बार, पार करके यह श्मशान
क्योंकि दिल में मेरे आज भी एक बचपना गुमनाम है
शोर तो बहुत था इस मन में
पर थम गया सा फिर आज एक तूफान है
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