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मृत्यु के पार की मिठास

                
                                                         
                            मृत्यु
                                                                 
                            
वेदना की अंतिम चीख है,
पर उसके पार
एक ऐसी निस्तब्धता है
जिसमें कोई पीड़ा नहीं बचती।

जीवन भर की कड़वाहट
जब अंतिम साँस में घुल जाती है,
तो मृत्यु
अचानक
मधुर लगने लगती है।

जैसे आँवला चखने के बाद
एक घूँट पानी
जीभ पर उतरता है,
और वही कसैलापन
क्षणभर में
मधुर स्मृति बन जाता है।

शायद मृत्यु भी ऐसी ही है,
जीवन की समस्त कसक
अपने भीतर समेटकर
अंततः
शांति का स्वाद दे जाती है।

जीवन ने जिसे
अंत कहा,
वह शायद
वेदना के बाद
मिलने वाली
सबसे गहरी निस्तब्ध मिठास है।
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4 घंटे पहले

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