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वैराग्य

                
                                                         
                            वैराग्य तटस्थ शांतचित्त शक्ति
                                                                 
                            
इन्द्रिय सुख से मन विरक्ति
छोड़  ,राग, द्वेष    आसक्ति
रहती   माया मोह मन मुक्ति।।

'पर' , 'वैराग्य' का सर्वश्रेष्ठ रुप
मोक्ष दायिनी  इसका प्रारूप
सतोगुण रजोगुण और तमोगुण
अहंकार मुक्त ,मन बुद्धि निपुण।

'अपर' वैराग्य का  वह    रूप
उपजता,प्रतिक्रिया के स्वरूप
दोष-दृष्टि रख,भोग का त्याग
विषयी इच्छा का    परित्याग।

अल्पकालिक आंशिक विराग
कुछ पल क्षणों का परित्याग
मोह-माया ,रोजमर्रा से विलग
परिस्थितिजन्य सन्यास अलग।

संजोए सपने जब जाते बिखर
सताने लगे,    अपनों  का डर  
भावनाओं को जब लगती चोट
लेता मरकट  सम  वैराग्य ओट।

अत्यधिक तनाव,या हो हताश
असफलताओं से होते निराश
मनःस्थिति की  बनती   न्यास
सबकुछ छोड़ ले लें संन्यास
 
  श्मशान में देख जलता शरीर
  है सब कुछ नश्वर होता अधीर
  अल्पकालिक  उठता    वैराग्य
   माया, मोह ,बंधन  दें त्याग ।।

    कुछ रोज रह  ,  संसार दूर
    खुद पर ऊर्जियत का सुरुर
     कर स्वयं में   उर्जा   पुनर्भरण
     रोकता मनुष्य मन का क्षरण।

    जो मौन व्रत या ध्यान से आता
    अल्पकालिक वैराग्य कहा जाता
     यह एक   भावनात्मक  उपचार,
     मानसिक स्पष्टता,फ़ोकस सुधार।
    
     
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17 घंटे पहले

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