अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस
हर वर्ष मनाते हैं सहर्ष।
जिनका भी उत्पादन में योगदान,
कॉफी-उद्योग को मि सम्मान।।
"हर कप के पीछे जो विद्यमान,
इस जश्न में हो उनका सम्मान।"
किसान और श्रमिक केंद्रित स्कीम,
संयुक्त राष्ट्र की यह है थीम।।
"कॉफी हर हल का हिस्सा है,"
आजीविका का यह किस्सा है।
सतत विकास का रखकर ध्यान,
प्रचार-प्रसार का बनता प्लान।।
ऊर्जावर्धन को सदियों से ज्ञेय,
चाय और कॉफी—दोनों पेय।
कॉफी भुने बीजों से बनती,
चाय पत्तियों से है छनती।।
काश! कॉफी भी होती चाय,
बनती आम जन का पर्याय।
सस्ती, सुलभ चाय की निशानी,
महंगी, सीमित—कॉफी शानी।।
कॉफी तीव्र ऊर्जा की दाता,
चाय से मन शांत हो जाता।
कैफीन के ही अंतर के कारण,
भिन्न गुणधर्म दोनों करते धारण।।
पाचन के उपरांत जो प्राप्त,
पशुओं के मल से निष्पाप।
होती अति महंगी और नाकाफी,
दुर्लभ, जैविक वही तो कॉफी।।
चाय कराती सहज मुलाकात,
अनौपचारिक, खुलकर बात।
विशिष्ट वर्ग, सीमित वार्ताएं,
कॉफी संग हद में की जाएं।।
चलता रहे संवाद का दौर,
चाय, कॉफी या कुछ और।
गलतफहमियां होंगी कम,
परस्परता पाएगी दम।।
— विजय बहादुर तिवारी
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