वृद्धा आश्रम सुना था कहीं
हम लोगों का प्यार छुपा हैं वहीं
जो हमें देते थे सहारा, आज बेसहारा है वहीं
कोई है रिश्तों से बेखबर, हो डॉक्टर चाहे इंजीनियर
नही कोई मोहताज़, जो सवार ने सकें जिन्दगी उनकी
फिर भी उदासी पसरी है वही
हर किसी को आस है, की कोई अपना है आसपास
हर सांझ ढल जाता है सूरज, छुप जाता है उजाला वहीं
वृद्धा आश्रम सुना था कहीं
आओ आज फिर उड़ा दो प्यार की चादर
कर दो दरकिनार, दरमियान फासला
रहे जाय "वृद्ध आश्रम" सुना था कहीं
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