ख़ुद की कलम से ख़ुदी की शिकस्त , को कैसे बयान किया जाये....
चलो इक दफ़ा फिर से , अल्फ़ाज़ों का सहारा लिया जाये....१
कल फिर उसूलों को, बाजार में बेच आया मैं...
जो पैसे मिले हैं उनसे, कब तक गुजारा किया जाये....२
जिस्म छलनी होता, तो मैं सिल भी देता...
बताओ अब रूह को, किस धागे से सिया जाये....३
जो थोड़ा ईमान बचा है, बहुत सस्ते में नीलाम कर रहा हूं...
ये आखिरी ऐलान, अब हर बाजार में किया जाये...४
"अजय" कहता है कि , अब बेऱहम बन जा...
ऐ दोस्त आ तेरी बात को , सही साबित किया जाये....५
अब कोई बादल , सूरज को और नहीं छिपा सकता....
चल अब हर रात से , अंधेरे का बदला लिया जाये....६
...अनुराग यादव
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