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तुम ललचाते हो दूसरे के बच्चे

                
                                                         
                            तुम ललचाते हो दूसरे के बच्चे |
                                                                 
                            
हम ललचाते हैं उनके मां-बाप |
हाय ईश्वर, यह क्यों नहीं होता?
बदल जाएं हम और आप ||

अपनों में कमियां ढूंढें |
दूसरों में विशेषता ही विशेषता |
वक्त आने पर पता चलता है |
कि कौन अपना कौन है विशेष ||

- अनमोल त्रिपाठी
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10 घंटे पहले

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