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शिक्षक हैं महानायक

                
                                                         
                            बच्चे झूठ बोल रहे हैं
                                                                 
                            
जब मुंह खोल रहे हैं
शिक्षक हैं नायक,महानायक
बच्चे शिक्षक को खलनायक
बना रहे हैं ,बात बना रहे हैं
घर में झूठी बातें बता रहे हैं
छोटे छोटे बच्चों को
बच्चे मत समझो
ये गुटखा,पान मसाला खा रहे हैं
बच्चे गलत राह पर जा रहे हैं
कक्षा में बतिया रहे हैं
घर में बतिया रहे हैं
मोबाइल पर है इनका ध्यान
झूठी है इनकी मुस्कान
पढ़ाई-लिखाई पर नहीं है ध्यान
देश के भविष्य हैं ये,हैं ये कर्णधार
शिक्षक हैं देश के खेवनहार
शिक्षक हैं देश के सृजन हार
पर क्या शिक्षक की कोई सुन रहा है
शिक्षक घर में,विद्यालय में बात सुन रहा है
अच्छे अच्छे शिक्षक खा रहे हैं डांट फटकार
कहां जा रहा है यह सुंदर सा संसार?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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12 घंटे पहले

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