आज लोग खुशी खरीदना चाह रहे हैं
वे रेडियो, दूरदर्शन,गाड़ी,घर ला रहे हैं
नाव, तालाब,महंगे फोन घर ला रहे हैं
पर खुशी से बहुत वे दूर जा रहे हैं
खुशी मन के अंदर से आती है
कहीं यह पैसे से खरीदी जाती है?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X