लिखता हूं मैं प्यार
लिखा जाता है स्वदेश प्यार
लिखता हूं देश
लिखा जाता है स्वदेश
लिखता हूं शांति
लिखा जाता है क्रांति
बात समझ पाता नहीं हूं
बिना "जय हिंद" बोले रह पाता नहीं हूं
बिना " इंकलाब जिंदाबाद" बोले रह पाता नहीं हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X