इक भरा घर संभालती है माँ ।
अपने बच्चों को पालती है माँ ।
दुख उठाकर दुआयें दे देके ।
हर मुसीबत को टालती है माँ ।
आग पे रख के सब्र की हांडी ।
रोज कंकर उबालती है माँ ।
गुनगुनाती हैलोरियां अक्सर ।
गोद में जब उछालती है माँ ।
करके ताकीद झूठ मत बोलो ।
सच के सांचे में ढालती है माँ ।
बच्चे बाहर निकाल देते हैं ।
किसको घर से निकालती है माँ ।
फिक्रे अंजुम जहां है गोता जन ।
वहसमुंदर खंगालती है माँ ।
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