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इक भरा घर संभालती है माँ

                
                                                         
                            इक भरा घर संभालती है माँ ।
                                                                 
                            
अपने बच्चों को पालती है माँ ।

दुख उठाकर दुआयें दे देके ।
हर मुसीबत को टालती है माँ ।

आग पे रख के सब्र की हांडी ।
रोज कंकर उबालती है माँ ।

गुनगुनाती हैलोरियां अक्सर ।
गोद में जब उछालती है माँ ।

करके ताकीद झूठ मत बोलो ।
सच के सांचे में ढालती है माँ ।

बच्चे बाहर निकाल देते हैं ।
किसको घर से निकालती है माँ ।

फिक्रे अंजुम जहां है गोता जन ।
वहसमुंदर खंगालती है माँ ।
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3 वर्ष पहले

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