विकल करे ये रिक्तता, अब हम सुषमा हीन।
पल में छीना काल ने, पंचतत्व में लीन।।
कुशल प्रखर वक्ता रहीं, मुख पर ले मुस्कान।
साड़ी के परिधान में, बिंदी थी पहचान ।।
नारी की पर्याय थीं,उत्तम जीवन काल।
नेक कार्य जो आपके, बनें सभी की ढाल।।
जन जन की वाणी बनीं,अमर रहेगा नाम।
राजनीति को दे गयीं, आप नया आयाम।।
अनिता सुधीर आख्या
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