ज़िन्दगी का सफ़र जो दुश्वार है
कैसे कह दूँ कि ख़ार ही ख़ार है
ज़ख्म मिले भी हैं ग़र दोस्तों से हमें
वो भी अब भर जाने को तय्यार हैं।
नफ़रतें लाख गहरी सही दोस्तों,
दिलों को करीब लाता तो प्यार है।
जग में उजाला करना ही मेरा काम हैं
सूरज नहीं हूँ पर जुगनू मेरा संसार हैं ।
क्यों ग़म के समन्दर में डूबा जा रहा है 'अदा'
रख भरोसा खुदा पर एक वो ही तेरा यार है।
-अनिता दासानी,'अदा'
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