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जिंदगी और बहुत कुछ है हकीकत के सिवा

                
                                                         
                            और कुछ था ही नहीं दिल में चाहत के सिवा
                                                                 
                            
करना कुछ हमको आया न मोहब्बत के सिवा
ये तो अच्छा हुआ,हमको न मांगना आया
पास दुनिया के भी कुछ था नहीं नफरत के सिवा
पीढ़ियों के इंतजामात का सोचा भी नहीं
कुछ कमाया न गया,हमसे जरूरत के सिवा
सख्त दिली अपनी एक जगह छोड़ देनी थी
उसने मुझसे भी कुछ मांगा नहीं कुर्बत के सिवा
दूर वालिद की वो नाराजगी कर भी लेगा
दे सका कुछ नहीं औलाद जो इज्जत के सिवा
मिन्नतें करके क्यों उसने था बुलाया हमको
सारे बंदोबस्त रखे आँखों के शरबत के सिवा
जान बूझकर के महफिलों से दूर रहता हूं
हमको मिल जाएगा, क्या भी वहां शोहरत के सिवा
वो फ़रिश्ता था या शैतान ख्वाब में बोला
इश्क की मंजिल क्या है भी फजीहत के सिवा
शायरों के शहर में रहते रहते इल्म हुआ
जिंदगी और बहुत कुछ है हकीकत के सिवा
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एक घंटा पहले

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