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पग पीछे न जाए

                
                                                         
                            शूर वही, जो सत्य-पंथ पर,
                                                                 
                            
हँसकर शीश चढ़ाए।
संकट चाहे लाख खड़े हों,
पग पीछे न जाए।।

सुर वह, जिसकी मधुर तान से,
मन का तम मिट जाए।
सूखे अधरों पर मुस्कानें,
जीवन-गीत सुनाए।।

सूर भले ही नयन-विहीन हो,
दुनिया को समझाए।
बाह्य-नयन जब राह न देखें,
अंतर-दीप दिखाए।।

शब्द तीन हैं, अर्थ अनोखे,
अद्भुत भाव समाए।
शूर हृदय हो, सुरमय जीवन,
सूर-दृष्टि पग पाए।।

-पंडित अनिल
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47 मिनट पहले

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