राजनीति में आज है, जातीयता प्रचंड।
कैसे मिटै समाज में,कौन विधि खंड खंड।।
- अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर, कानपुर।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X