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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                             दल बदल 
                                                                 
                            
दल बदलू का दल बदला , पर दिल नहिं बदला जाय।
धरिणी गगन मिलत दिखें , फिर भी क्षितिज कहाय।।

 काला धन 

काला धन जिन चाहिए , ढूंढें सुरक्षित गेह।
मगर मुंह में पग पकड़ , गहरे पानी खेह।।


--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।


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7 वर्ष पहले

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