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मेरे अल्फाज़

नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

49 कविताएं

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 दल बदल 
दल बदलू का दल बदला , पर दिल नहिं बदला जाय।
धरिणी गगन मिलत दिखें , फिर भी क्षितिज कहाय।।

 काला धन 

काला धन जिन चाहिए , ढूंढें सुरक्षित गेह।
मगर मुंह में पग पकड़ , गहरे पानी खेह।।


--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।


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