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मेरे अल्फाज़

दोहे

AL Mishra

45 कविताएं

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संत


संत धरणि पर पग धरहि , धरणि धन्य हुइ जाय।
संत चलहि नहि धरणि पर , नभ में उड़ उड़ जाय।।

राजनेता

जन प्रतिनिधि परहेज करें , जनता से भी भेंट।
जन सेवा से अधिक रूचि , भावैं माला भेंट।।

शिक्षक (गुरु )

मुंह में पान मसाला , ऐसे गुरुवर आज।
आँखों में चश्मा काला , देते शिक्षा आज।।

--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।


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