संत
संत धरणि पर पग धरहि , धरणि धन्य हुइ जाय।
संत चलहि नहि धरणि पर , नभ में उड़ उड़ जाय।।
राजनेता
जन प्रतिनिधि परहेज करें , जनता से भी भेंट।
जन सेवा से अधिक रूचि , भावैं माला भेंट।।
शिक्षक (गुरु )
मुंह में पान मसाला , ऐसे गुरुवर आज।
आँखों में चश्मा काला , देते शिक्षा आज।।
--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।
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